सितंबर 13, 2008

लाल टिब्बा पर पिज्जा...

लाल टिब्बा भी क्या कमाल की जगह है. मसूरी का सबसे ऊंचा प्वाएंट यही है......वैसे इसका नाम रेड हिल है मगर लोकल भाषा में इसे लाल टिब्बा ही कहा जाता है. कहते हैं की मसूरी सबसे पुरानी बस्ती यही है.लाल टिब्बा जाने का प्रोग्राम भी अचानक ही बना...मेरे छोटे भाई की तरह मुकुल ने मुझसे फोन पर कहा "आज लाल टिब्बा चलना है " मैंने पूछा कोई खास बात है वहां ....मुकुल ने कहा "सुना है वहां पिज्जा बहुत अच्छा मिलता है आज वही पिज्जा खायेंगे" .
मुझे हमेशा से ऐसे प्रोग्राम अच्छे लगते हैं ..हम चार -पाँच लोग लाल टिब्बा के लिए 11 बजे निकल लिए मैं, अंजू, मुकुल और मुक्ता....काफिला चल पडा लाल टिब्बा की ओर...मसूरी से बमुश्किल 6 किमी. चलने के बाद लाल टिब्बा आने वाला था कि रास्ते में एक खूबसूरत सा चर्च मिला. इतवार का दिन होने कि वजह से काफी भीड़ भाड़ थी कुछ देर हम वहां रुके...कानों में प्रार्थनाओं के स्वर गूंजते रहे यह केल्लोग चर्च था जो 1903 में बनाया गया था बहुत ही अच्छा लग रहा था...पता किया तो बताया गया कि लाल टिब्बा थोड़ा आगे ही है... हम आगे बढे ....सिस्टर मार्केट कि तरफ़ जाने के लिए किसी ने कहा ......हम सिस्टर मार्केट कि तरफ़ चल दिए. बताना चाहूँगा 'सिस्टर मार्केट' दरअसल इस जगह को इसलिए कहा जाता है क्यूंकि यहाँ अँगरेज़ काल में हॉस्पिटल था और अंग्रेजों के आला अफसरों का इलाज़ यहीं होता था..इलाज़ करने वाली सिस्टर अपनी सामान्य खरीददारी यहीं करती थी तभी से इस जगह का नाम सिस्टर बाज़ार पड़ गया....हम सिस्टर बाज़ार पहुंचे . नज़र दौडाई तो देखा दूरदर्शन और आल इंडिया रेडियो का टॉवर भी यहाँ है 7700 फीटी ऊंचाई पर यह टावर वाकई हैरान कर देने वाला तथ्य था. 1975 में यह टावर यहाँ स्थापित किया गया था (शायद भारत में सबसे ऊपर दूरदर्शन का टावर यही है) इतवार का दिन होने कि वज़ह से स्कूली बच्चे तो नही दिखे मगर लोगों ने बताया कि इस एरिया में मिशनरी स्कूल बड़ी संख्या में हैं. मुकुल ने जानकारी दी कि पिज्जा वाली दुकान का नाम देवदार होटल है....हम लोग देवदार पहुंचे सीधी ऊँचाई पर यह होटल बिल्कुल पुराने डाक बंगलों की तरह बना हुआ था. बड़े बड़े कमरे बीच में अलाव सुलगाने की जगह ..ऊंची ऊंची छतें सुनसान तिब्बती शक्लों वाले बैरे ...हमें अब तक भूख भी लग चुकी थी मौसम खुशगवार था हमने देवदार के अन्दर पिज्जा खाने की बजे इस होटल के बहार खड़े विशालकाय पेड़ के नीचे कुर्सिओं पर बैठकर पिज्जा खाने का मन बनाया ........पिज्जा खाने का यह अनुभव भी जोरदार रहा......आर्डर लेने के करीब 40 मिनट के बाद पिज्जा परोसा गया ...पिज्जा भी बिल्कुल देसी तरीके से बना था ......पिज्जा का बेस काफी पतला और डिजाइनदार था.......हमने इस बड़े पिज्जा को बड़े चाव से खाया......शायद 7500 फीट की ऊंचाई पर पिज्जा खाने का ये शानदार अनुभव था .......जल्दी ही फ़िर आने का वादा कर हम इस लाल टिब्बा को सलाम कर वापस हो लिए...जल्दी मिलेंगे लाल टिब्बा...........सलाम लाल टिब्बा

4 टिप्‍पणियां:

masijeevi ने कहा…

कुछ दिशा आदि के विषय में और बताएं। 6 किमी की यात्रा पैदल रही या वाहन से।

अगली मसूरी यात्रा में इस पिज्‍जा तीर्थ को भी जोड़ेंगे। लिखते रहें।

अभिषेक ओझा ने कहा…

बिना चित्रों के तो बस लाल टिब्बा का पिज्जा ही याद रह जायेगा... मसूरी है तो कुछ तस्वीर भी लगाइए.

sumati ने कहा…

bahut khub,tumhari yatra jari rahegi,durg (acadmy) k bahar hi sahi.achha laga
sumati

SATYAM NEWS MAINPURI ने कहा…

kkk