तेरे मिलने के लम्हे फूल जैसे,
मगर फूलों की उम्रें मुख़तसर हैं.
एक और नमूना देखेंताम्मुल कत्ल में तुझको मुझे मरने की ज़ल्दी है,
खता दोनों की है उसमे कहीं तेरी कहीं मेरी।
एक मशहूर ग़ज़ल तो उनकी zउबन पर सुनी जा सकती है
रंजिश ही सही................
अहमद फ़राज़ के बारे में आगे गुफ्तगू जारी रहेगी अगर आपको भी फ़राज़ साहेब के बारे में आप हमारे साथ शेयर करे.