नवंबर 28, 2008

तुम्हे क्या हो गया है...मुंबई ?

मन बहुत उदास है। मुंबई में आतंकी हमले में सैकड़ों लोगों की ,तमाम पुलिस अफसरों की जानें गयी और ताज होटल, ट्राईडेंट ,नरीमन प्वाइंट जैसे स्थानों के अलावा धरोहरस्वरुप कई पुरानी इमारतों का नुकसान हो गया.निरीह जनता का खून यहाँ बेवज़ह क्यों बहता है. यह क्या हो गया है आमची मुंबई को, किसकी नज़र लगी है इस शहर को कुछ समझ नही आता..... समस्त दिवंगत आत्माओं को हमारी हार्दिक श्रद्धांजलि.
हे ईश्वर, अमन चैन के दुश्मन इन चरमपंथिओं को सदबुद्धि दो. मानवता की यही पुकार है.....

10 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

"यही हाल शायद सभी भारतीय नागरिक का होगा और इसी असमंजस की स्थति भी, हर कोई आज अपने को लाचार बेबस महसूस कर रहा है और रो रहा है अपनी इस बदहाली पर ...समस्त दिवंगत आत्माओं को हमारी हार्दिक श्रद्धांजलि.
"

बेनामी ने कहा…

अपनी एक जुटता का परिचय दे रहा हैं हिन्दी ब्लॉग समाज । आप भी इस चित्र को डाले और अपने आक्रोश को व्यक्त करे । ये चित्र हमारे शोक का नहीं हमारे आक्रोश का प्रतीक हैं । आप भी साथ दे । जितने ब्लॉग पर हो सके इस चित्र को लगाए । ये चित्र हमारी कमजोरी का नहीं , हमारे विलाप का नहीं हमारे क्रोध और आक्रोश का प्रतीक हैं । आईये अपने तिरंगे को भी याद करे और याद रखे की देश हमारा हैं ।

Himanshu Pandey ने कहा…

ishvar se pukar kar man ko thodee sahnti mil jaatee hai.
हे ईश्वर, अमन चैन के दुश्मन इन चरमपंथिओं को सदबुद्धि दो.main bhee ise duharaana chahataa hoon.

Abhishek Ojha ने कहा…

:(

प्रवीण त्रिवेदी ने कहा…

" शोक व्यक्त करने के रस्म अदायगी करने को जी नहीं चाहता. गुस्सा व्यक्त करने का अधिकार खोया सा लगता है जबआप अपने सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पाते हैं. शायद इसीलिये घुटन !!!! नामक चीज बनाई गई होगी जिसमें कितनेही बुजुर्ग अपना जीवन सामान्यतः गुजारते हैं........बच्चों के सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पा कर. फिर हम उस दौर सेअब गुजरें तो क्या फरक पड़ता है..शायद भविष्य के लिए रियाज ही कहलायेगा।"

समीर जी की इस टिपण्णी में मेरा सुर भी शामिल!!!!!!!
प्राइमरी का मास्टर

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

मन तो उदास रहेगा ही. आइये हमारी नई पोस्ट का आनंद लीजिये..........मन तो हमारा भी उदास है इस कारण अपनी दीदी की कविता लिखी है.
http://kumarendra.blogspot.com

sandhyagupta ने कहा…

Shok ki is ghadi me sab ko ek sath khade hone ki jarurat hai.

ज़ाकिर हुसैन ने कहा…

ये एक दुःख की घडी है. इसका सामना हम सबको मिल कर करना होगा और अपनी एकजुटता बनाये रखनी होगी.
आप ने अपना कीमती समय मेरे ब्लॉग को भी दिया आभारी हूँ. नेट पर कम ही आता हूँ. कभी आपकी शुक्रगुजारी अदा न कर पाऊँ तो माफ़ कर दीजियेगा.

मुरादनगर ठीक ही है. क्या आप उस जगह को जानते हैं या वहां से कोई सम्बन्ध है. कृपया बतियेगा ज़रूर

sandeep sharma ने कहा…

सभी दिवंगत आत्माओं को हार्दिक श्रद्धांजलि.

BrijmohanShrivastava ने कहा…

एस डी एम् साहेब /अब कुछ लिखिए